झूठ बोले कौआ काटे : भ्रष्टाचार को छिपाने वनमंडलाधिकारी मुंगेली बोल रहे झूठ।
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा मुंगेली। 16 जून 2021, किसी के प्राण रक्षा हेतु यदि झूठ बोला जाये तो झूठ बोलने वाला निंदा का पात्र नहीं बनता,किंतु मातहत द्वारा बड़े पैमाने पर किये गये भ्रष्टाचार को छिपाने हेतु यदि बड़े अधिकारी द्वारा झूठ का सहारा लिया जाये तो सरकारी तंत्र को लानत है। आईये जानते हैं आखिर क्यों जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी को परिक्षेत्र अधिकारी के बचाव में झूठ बोलना पड़ा।
मामला वनविभाग से संबंधित है। मुंगेली जिला में छग राज्य सड़क परिवहन परियोजनान्तर्गत पैकेज 21 के तहत लोरमी पैजनिया मसना मसनी जरहागाँव सड़क निर्माण हेतु मार्ग में पड़ने वाले वृक्षों का विदोहन एवं परिवहन वन विभाग के लोरमी उत्पादन परिक्षेत्र द्वारा कराया गया है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो पेड़ों की कटाई और परिवहन कार्य में वन विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है। विदोहन हेतु चिन्हांकित पेड़ों के अलावा प्रभारी अधिकारी एवं मैदानी अमला द्वारा आस पास के बेश कीमती ईमारती पेड़ों की कटाई कर लकड़ी तस्करों को बेच दिया गया हैं। काटे गये जड़ों की खुदाई तथा लकड़ी एवं ठूँठों के परिवहन हेतु बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के जेसीबी एवं माल वाहक वाहनों का बिना कोटेशन मंगाये उपयोग किया गया हैं।
उपरोक्त संबंध में जानकारी प्राप्त करने ग्राम जमकोर के देवी प्रसाद द्वारा लोरमी उत्पादन परिक्षेत्र में जन सूचना का अधिकार आवेदन लगाया गया था। जन सूचना अधिकारी द्वारा गोल मोल जवाब देते हुए आवेदक को पत्र लिख कर सूचित किया गया कि विदोहन एवं परिवहन से संबंधित समस्त दस्तावेज मुंगेली परिक्षेत्र को हस्तांतरित कर दिया गया है। अत: वाँछित जानकारी मुंगेली वन परिक्षेत्र से प्राप्त करें।
आवेदक द्वारा मुंगेली वन परिक्षेत्र कार्यालय में संपर्क किये जाने पर परिक्षेत्राधिकारी द्वारा पत्र जारी कर कार्यालय में केवल केश कापी उपलब्ध होने तथा शेष सभी दस्तावेज उच्च कार्यालय भेज दिये संबंधी सूचना देते हुए पृथक से आवेदन करने का सुझाव भी दिया गया हैं।
लोरमी (उ) एवं मुंगेली कार्यालय के जन सूचना अधिकारियों द्वारा याचित जानकारी प्रदान नहीं किये जाने पर आवेदक द्वारा वनमंडलाधिकारी मुंगेली के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत कर जानकारी प्रदाय कराने की माँग किया गया हैं।
जन सूचना अधिकार के प्रथम अपीलीय अधिकारी राम अवतार दुबे (भा.व.से.) वनमंडलाधिकारी मुंगेली द्वारा अपील स्वीकार कर सुनवाई हेतु दिनाँक 24.03.2021 की तिथि निर्धारित कर इसकी सूचना अपीलार्थी तथा जन सूचना/वन परिक्षेत्राधिकारी लोरमी (उ) को दी गई थी। निर्धारित तिथी को सुनवाई में प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष केवल अपीलार्थी ही उपस्थित हुआ था, जबकि प्रति अपीलार्थी जन सूचना अधिकारी सुनवाई में अनुपस्थित थे।
सुनवाई कार्यवाही के दौरान अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदन में याचित " छग राज्य सड़क परियोजनान्तर्गत पैकेज 21" के सड़क निर्माण में प्रभावित होने वाले वृक्षों के विदोहन एवं परिवहन संबंधी एक बिंदु पर आधारित याचना को स्वविवेकानुसार दो अलग - अलग बिंदु क्रमश: विदोहन एवं परिवहन में विभक्त कर केवल प्रथम बिंदु विदोहन की जानकारी प्रदाय कराये जाने संबंधी मौखिक आश्वासन अपीलार्थी को देते हुए शेष जानकारी के लिए पृथक से आवेदन प्रस्तुत करने सलाह दिया गया हैं।
सुनवाई के बाद आवेदक प्रथम बिंदु विदोहन से संबंधित जानकारी हेतु जन सूचना अधिकारी के सूचना पत्र की प्रतीक्षा करने लगा। सुनवाई के ढाई माह बाद आवेदक को जन सूचना अधिकारी के सूचना पत्र की जगह डाक के माध्यम से प्रथम अपीलीय अधिकारी का आदेश प्राप्त हुआ। जिसमें भा.व.से. जैसे महत्वपूर्ण एवं गरिमामय पद पर पदस्थ अधिकारी का अविवेकपूर्ण, अशोभनीय एवं अस्वीकार्य करने योग्य असत्य कथन से परिपूर्ण आदेश मिला। पारित आदेश में प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा सुनवाई में अनुपस्थित जन सूचना अधिकारी को "उभयपक्ष" उपस्थित तथा समाचार प्रकाशन तक आवेदक को अप्राप्त जानकारी को जन सूचना अधिकारी द्वारा प्रदान कर दिया जाना निरुपित किया गया है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा अपने आदेश में असत्य कथन का सहारा लिया जाना यह प्रमाणित करता है कि सड़क निर्माण हेतु विदोहन कार्य में पंजीयन हेतु चिंहित वृक्षों से कई गुना अधिक पेड़ो की कटाई प्रभारी अधिकारी द्वारा कराया जा कर लकड़ी तस्करों को बेचा गया है, तथा लाभांश सीढ़ी दर सीढ़ी ऊपर तक पहुँचाया गया है। शायद इसी कारण वनमंडलाधिकारी को परिक्षेत्राधिकारी को बचाने झूठ का सहारा लेना पड़ रहा है।
बहरहाल आवेदक ने जारी आदेश को अस्वीकार करते हुए वनमंडल मुंगेली कार्यालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत कर राज्य सूचना आयोग के समक्ष शिकायत पत्र प्रेषित किया गया है।
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