संत गुरू घासीदास की जयंती के जनक दादा नकुलदेव ढीढ़ी जयंती पर विशेष
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर। 12 अप्रैल 2021, दादा नकुलदेव ढीढ़ी जी ने छत्तीसगढ़ के महान संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की जयंती पर्व का 18-दिसंबर 1938 को अपने ही गृह ग्राम भोरिंग से शुभारंभ किया था। उनके जन्म 12 अप्रैल 1914 को और सतलोक गमन 16 अगस्त 1975 में हुआ।
एक अपील: जिस तरह दादा नकुल देव ढीढ़ी जी ने संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की जयंती को स्थापित करने के लिए अपना तन मन और धन सर्वस्य निछावर कर दिया। जिसके कारण आज हम सभी अपने इतिहास को जानने के लायक बन पाए हैं। उसी तरह से राजागुरु बालकदास जी के जन्म व शहादत दिवस, भुजबल महंत व बखारी भंडारी सहित विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में हुए महान अभियान के स्मृति में मानवाधिकार स्वाभिमान दिवस,हमारे लाखों पुरखों के द्वारा सन 1820-30 मे किए गए आंदोलन के स्मृति में सतनामी क्रांति प्रारंभ स्मृति दिवस, संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी द्वारा स्थापित मानवतावादी सतनाम धर्म के स्मृति में सतनामी धर्म स्थापना स्मृति दिवस व अन्य सामाजिक धार्मिक सांस्कृतिक ऐतिहासिक दिवसों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अपने इतिहास संस्कृति को स्थापित करने के कार्य में हम सब मिलजुल कर आगे आएं और दादा नकुल देव जी के सच्चे अनुयायी बनकर दिखाएं। यही हमारा उनके प्रति सम्मान होगा। ये कथन हैं कुमार लहरे महासचिव एसपीएम संगठन के प्रमुख की।
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा में नकुल देव जी की जयंती पर्व एवं स्मृति दिवस पर निरंतर उनके जीवनी पर आधारित महत्वपूर्ण भूमिका योगदान पहुलुओं को लेकर विशेष रूप से प्रकाशित कर प्रचार प्रसार किया जाता रहा हैं।
दादा नकुल देव जी आजीवन निरंतर संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की सतोपदेश अमृत वाणी,को जन जन तक पहुंचाने संकल्पित हो तत्पर रहे थे।
पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश भर के विभिन्न स्थानों पर जहां सतनामी समाज के लोग अधिक संख्या में निवासरत रहे थे, वहां मूल सराई लकड़ी की जैतखाम स्थापित कराते हुए संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की बताएं सत मार्ग में चलने आग्रह कर मानव जीवन को सफल बनाने पर जोर देते रहे थे।
भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर के भी विचार धाराओं से आजीवन जुड़े हुए थे, उनके साथ ही छत्तीसगढ़ के महान संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी के सतनाम संदेश उपदेश अमृत वाणी को लेकर विशेष रूप से प्रचार प्रसार करते रहे थे।
दादा नकुल देव जी छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनन्य भक्त अम्बेडकर वाद के और संत गुरू घासीदास बाबा जी की जयंती के जनक भी माने जाते हैं। सामाजिक धार्मिक सांस्कृतिक विकास उत्थान कार्य को लेकर अपने निजी स्वार्थ सिद्ध से ऊपर उठकर अपने स्तर पर समर्पित भाव से समाज जन सेवा में निरंतर सार्थक प्रयास करते हुए उन्होंने सैकड़ों (100) एकड़ अपने पैतृक भूमि को सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
इनके जैसे सतनामी समाज में एकजुटता बनाएं रखने वाले समाज जन सेवक प्रमुख कार्यकर्ता अग्रणी आज तक कोई उनके स्थान लेने वाले नहीं हुए।
जिनकी अपूर्णीय क्षति समाज को हुई जिनकी भरपाई आज तक नहीं हो पाया हैं। उनके द्वारा किए गए कार्यों को स्मरण करते हुए दादा नकुल देव जी की जयंती पर्व और स्मृति दिवस पर विभिन्न सामाजिक धार्मिक सांस्कृतिक विकास उत्थान हेतु कार्यरत संगठनों द्वारा कार्यक्रम आयोजन कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सादर नमन किया जाता रहा हैं।
बहुत बढ़िया लेख। दादा नकुल ढीढ़ी द्वारा समाज को आगे बढ़ाने के लिए अपना टाईम टेलेंट और ट्रेजरी न्यौछावर कर दिया। उन्हें उनके जयंती के अवसर पर विनम्र आदरांजलि। दादा नकुल ढीढ़ी हमारे दिलों में सदा अमर रहेंगे। इतना सुंदर लेख लिखने और छापने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।
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