ऐसे होता है जल ,जंगल और जमीन को भारी नुकसान
जल: ज्यादातर ईट भट्ठे नदियों के किनारे संचालित हैं। जो पूरे समय नदी का पानी खिंचकर अपना अवैध कारोबार संचालित करते हैं। मनमाने ढंग से पानी का उपयोग कर रहे हैं।
जमीन: ईट भट्ठों का संचालन नदियों के कछारों पर हो रहा है। यह या तो वन भूमि है या राजस्व की। जिसका क्षरण भी तेजी से जारी है। इसकी के चलते कटाव भी बढ़ रहा है।
जंगल: इन ईट भट्ठों में ईट पकाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल होता है। ये लकड़ियां जंगल से अवैध ढंग से काटकर लाई जाती है। जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
जान: मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं हैं। मजदूर सामान्य ढंग से पूरा भट्ठा रचते हैं, फिर इस पर आग भी लगाते हैं। किसी हादसे से बचाव के लिए कोई उपाय भी नहीं हैं ।
नेताओं से लेकर अफसरों का संरक्षण: अवैध ईट भट्ठे साल दो साल नहीं बल्कि 10 से 15 सालों से चल रहे हैं। इनके संचालकों को नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक का संरक्षण है। यही वजह है कि कभी कार्रवाई की चाबुक इन पर नहीं चलती। सीधे तौर पर अवैध होने के बाद भी अफसर यहां हाथ डालने से बचते हैं। ईट भट्ठों में काम करने वाले मजदूर अपने मालिकों के खिलाफ सीधे बोलने से बचते हैं।
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खैरागढ़: नगर से लगे लालपुर, सोनेसरार, धनेली, पांडादाह व पिपरिया में नदी किनारे ईट भट्ठे संचालित हैं। इन भट्ठों को प्रशासन से कोई भी अनुमति नहीं हैं। स्थानीय मजदूर यहां काम कर रहे हैं। जिनके भरोसे ही ईट भट्ठे को रचने और पकाने का जोखिम भरा काम लिया जाता है। मजदूरों के मुताबिक पकाने और भट्ठे में आग छोड़ने के दौरान कोई विशेष जानकार व्यक्ति मौजूद नहीं रहता।
डोंगरगढ़: ब्लाक के ढारा, भंडारपुर, मेढ़ा, कातलवाही, बोरतलाव सहित आसपास में 30 से अधिक ईट भट्ठे चल रहे हैं। इन भट्ठों को भी कोई अनुमति नहीं हैं। बावजूद इनका संचालन बेधड़क सालों से जारी है। बीते पांच साल में तो इन हिस्सों में कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। उल्टे कभी -कभी मजदूर हादसों का शिकार हुए हैं। जिन्हें संचालकों द्वारा ही उपचार करा दिया जाता है।
अंबागढ़ चौकी: चौकी ब्लाक में शिवनाथ नदी के किनारे दर्जनों भट्ठे संचालित हो रहे हैं। हाथीकन्हार, सेंमरबांधा, दाउटोला, बोरहनभेड़ी, विचारपुर, मरचे सहित संचालित हो रहे ईट भट्ठों की शिकायत कई बार हो चुकी है। यहां भी सारा काम मजूदरों के भरोसे ही होता है। लेकिन अवैध रुप से संचालित इन भट्ठों को झांकने शिकायत के बाद भी अफसर मौके पर नहीं पहुंचते ।
डोंगरगांव: इस हिस्से में शिवनाथ नदी के किनारे और दूसरे इलाकों में भी दर्जनों अवैध ईट भट्ठों का संचालन जारी है। इनकी शिकायत समय-समय पर होती रहती है। लेकिन यहां भी करीब पांच छह साल से कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। ईट भट्ठों को देखने तक अफसर नहीं पहुंचते।

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