महासमुंद-प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज युवा प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश बंजारे व संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष मोहन बंजारे के आहावान पर महासमुंद युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रेखराज बघेल के नेतृत्व में जिला कार्यकारिणी सदस्य श्री मती ब्रिजेन बंजारे, शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष देवेन्द्र मिर्चें, जिला सहसचिव राजेश रात्रे, ब्लाक सचिव घनश्याम जांगड़े,ब्लाक अध्यक्ष लेखराज बंजारे, कार्यकारी ब्लाक अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ सचिन गायकवाड, नगर उपाध्यक्ष राजेश मार्कंडेय द्वारा छत्तीसगढ़ शासन महासमुंद जिला के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा जी को व मुख्यमंत्री के नाम से कलेक्टर महासमुंद को छत्तीसगढ़ में एससी एसटी आरक्षण के बगैर हो रही अनरिजर्व पद्धति से पदोन्नति को रोक लगाकर नये सिरे से आरक्षित श्रेणी के आधार पर पदोन्नति करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 के नियम 5 को प्रतिस्थापित कर अनुसूचित जाति आरक्षण 13% अधिसूचित करते हुए दिनांक 22/10/2019 को शासन द्वारा पूर्व में पदोन्नति में आरक्षण बहाल की गई थी। उक्त नियम को माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में चुनौती दी गई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले एम नागराज एवं जरनैल सिंह मामले का हवाला देते हुए शासन को उचित जवाब देने आरक्षण रोस्टर नियम 5 पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर को स्टे प्रदान किया एवं राज्य शासन को सुप्रीम कोर्ट में आए निर्णय के अनुसार नियम बनाने की बात कही ।राज्य शासन ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्गो के क्वांटिफिएबल डाटा कमेटी एकत्र करने माननीय मनोज कुमार पिंगुआ जी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है ।कमेटी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अपर्याप्तप्रतिनिधत्व के आंकड़े एवं प्रशासनिक दक्षता की रिपोर्ट तैयार करने कार्यशील है ।
माननीय हाई कोर्ट बिलासपुर छत्तीसगढ़ ने राज्य को कानून सम्मत उचित कार्यवाही एवं प्रशासन को रेगुलर प्रमोशन के लिए स्वतंत्रता प्रदान की गई है ।छत्तीसगढ़ शासन GAD हाई कोर्ट के आदेश को ही पालनार्थ सभी विभागों को भेज दिया ।जबकि उन्हें स्पष्ट सर्कुलर के साथ विभागों को जारी करना था ।डेढ़ साल की अवधि में 50000 से ऊपर पदों पर मेरिट(वरिष्ठता) के आधार पर पदोन्नति हो गई।ऊक्त सभी पदोन्नति सूची मे एससी एसटी वर्ग के महज 1-2 अधिकारी कर्मचारी शामिल है। सारे एससी एसटी रोस्टर पदों को अन्य अनरिजर्व सीट में भरा जा रहा है ।उक्त कृत्य राज्य के बहुसंख्यक वर्ग sc-st के संविधानिक अधिकारों का सीधा हनन करने प्रयास है। जबकि विभाग को 100 पदों में से 45 पद को स्टेय कर 55 पदों को मेरिट अर्थात अनरिजर्व में भरने थे। लेकिन विभाग द्वारा शत प्रतिशत पदों को अनरिजर्व में लगातार भरते जा रहे है।
ऐसे में सारे पद अनरिजर्व में ही भर जाएगा,परिणाम स्वरुप आगामी समय मे SC, ST वर्ग को पदोन्नति के लिए पद नहीं बचेगा।
शासकीय सेवाओ में SC, ST वर्गो की अपर्याप्तता की खाई और बढ़ती जाएगी।भारत का संविधान राज्य नीति निदेशक तत्व राज्य सरकार को राज्य अंतर्गत अनुसूचित जाति व जनजाति वर्गो के हितों का संवर्धन करने की बात कहती है।व अनुच्छेद 16(4)क,ख पदोन्नति में आरक्षण व अनुच्छेद 335 SC, ST वर्गो के शासकीय सेवाओ में दावे की गारंटी प्रदान करती है।उक्त सभी संवैधानिक प्रावधानो की वैद्यता सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखी है।
मुख्यमंत्री जी आप स्वयं हमारे नागरिक हमारी प्राथमिकता अभियान चला रहे हैं।
यदि आपकी प्राथमिकता में 45%समुदाय SC, ST वर्ग है तो मांगों को अविलंब पूर्ण करने सादर अनुरोध किया गया है।सामाजिक एवं कर्मचारी संगठन द्वारा राज्य सरकार को लगातार ध्यान आकृष्ट कराने के बाद भी सरकार के उदासीन रवैये से समाज तथा कर्मचारी संगठनो मे काफी नाराजगी एवँ आक्रोश है।अत: आपसे अनुरोध है कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की भावनाओ को ध्यान मे रखते हुए अतिशीध्र पदोन्नति मे आरक्षण प्रदान करने की कृपा करेंगे।
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