Sunday, June 13, 2021

सतनाम पंथ के प्रथम कैलेण्डर निर्माता पं.रतन लाल रत्नाकर गुरुगद्दी पटाढ़ी से सौजन्य भेंट विशेष चर्चा

सतनाम पंथ के प्रथम कैलेण्डर निर्माता पं.रतन लाल रत्नाकर गुरुगद्दी पटाढ़ी से सौजन्य भेंट विशेष चर्चा 
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर। 13 जून 2021, छत्तीसगढ़ के महान संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की जन्म संवत् को लेकर सतनाम पंथ के अनुयायियों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद प्रथम बार 2001 में गुरू घासीदास कैलेण्डर छत्तीसगढ़ नाम से पं. रतन लाल रत्नाकर ग्राम पटाढ़ी तहसील रामपुर जिला कोरबा निवासी द्वारा एक सार्थक प्रयास किया गया हैं।
पं.श्री रत्नाकर जी से 9 जून 2021को प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा सुघर गांव और सतगुरू कैलेण्डर रायपुर के संपादक श्रवण कुमार ने भ्रमण के दौरान उनसे सौजन्य भेंट कर विभिन्न सामाजिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर विशेष चर्चा किया। 
पं.रतन लाल रत्नाकर जी एक छोटे मजदूर किसान परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी ग्राम पंचायत पटाढ़ी के कई बार पंच बन जन सेवा में निरंतर तत्पर रहें थे। वे इसके साथ ही उस समय की सामाजिक धार्मिक विकास उत्थान कार्य की दशा और दिशा को देखते हुए गांव की राजनीति छोड़ सतनाम सत्संग भजन मंडली के माध्यम से संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की सतोपदेश अमृत वाणी को जन जन तक पहुंचाने प्रचार प्रसार करते रहे थे। 
श्री रत्नाकर जी बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद  व सतनामी समाज के गुरू माता ममतामयी मिनीमाता जी द्वारा संचालित समाज सुधार संगठन विस्तार और सांसद रहते हुए कोरबा जिले अंतर्गत ग्राम पंचायत पटाढ़ी को गुरू गद्दी दर्शन मेला आयोजन स्थल मुख्यालय बनाने की घोषणा भी किया गया था। जिनको मिनीमाता जी की उत्तराधिकारी पुत्र गुरू विजय कुमार जी गुरुगद्दी नशीन गिरौदपुरी धाम,अगमधाम खडूवापूरी धाम के द्वारा दीप प्रज्वलित कर गुरूगद्दी की स्थापना भी विशाल संत समागम की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न भी किया गया। तब से प्रति वर्ष बसंत पंचमी से सप्तमी तक त्रिदिवसीय संत समागम गुरू दर्शन मेला लगता आ रहा हैं। जो जोगी नाला से और कोरबा चांपा मुख्य मार्ग से लगा हुआ,जहां सतनाम सत्संग भवन, सांस्कृतिक मंच, जोड़ा जैतखाम निर्मित और चारों ओर हरे भरे फल फूल सुगंधित छांवदार वृक्ष लगा हुआ प्राकृतिक मनोरम दृश्य से अच्छान्दीत हैं। 
जिले कोरबा की एक मात्र सतनाम पंथ की जन आस्था विश्वास का केंद्र बिंदु बना हुआ हैं। जहां विभिन्न स्थानों से संत श्रद्धालुओं दर्शनार्थियों पर्यटकों का आवागमन होता रहता हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य में यदि सतनाम पंथ में कैलेण्डर प्रकाशन की बात करे तो सतनामी समाज की महत्वपूर्ण सारगर्भित आलेख जानकारी संग्रह उपलब्धियों को लेकर पंडित रतन लाल रत्नाकर ने 2001 से आज वर्तमान समय में भी करते आ रहे हैं। उनके बाद दूसरे बार संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की जन्म कर्म तपो महिमा दर्शन भूमि गिरौदपुरी धाम से प्रकाशित मासिक पत्रिका सतनाम सार के बैनर तले 2014 से 2016 तक तीन वर्षों तक संपादक अश्वनी कुमार रात्रे द्वारा किया गया। जिसमें श्रवण कुमार ने सह संपादक की भूमिका निभाई थी। तीसरे पहल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हृदय स्थल महादेव घाट रायपुरा सतनाम गुरूद्वारा भवन से 2018 से सतगुरू कैलेण्डर प्रकाशन निरंतर किया जा रहा हैं। जिसके प्रधान संपादक असकरन दास जोगी,संपादक श्रवण कुमार घृतलहरे हैं। वर्तमान में 24 पन्ने की सारगर्भित आलेख जानकारी संग्रह उपलब्धियों को लेकर विशेष रूप से सतनाम पंथ में पं. रतन लाल रत्नाकर द्वारा रचित गुरू घासीदास कैलेण्डर छत्तीसगढ़ और सतगुरू कैलेण्डर रायपुर से दो ही प्रकाशित किया जाता रहा हैं। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा गुरू घासीदास सामाजिक चेतना सम्मान विभिन्न अयोग्य अवसरवादियों को प्रदान किया जाता रहा हैं। उनमें अब तक पंडित रतन लाल रत्नाकर जी को भी 2 लाख रूपए और प्रशस्ति पत्र स्मृति चिन्ह दिया जाना चाहिए था। जिनसे उनकी आर्थिक परिस्थितियों में नियमित रूप से गुरू घासीदास कैलेण्डर छत्तीसगढ़ की प्रकाशन में सहयोग मिल जाता। जिनके वे असली हकदार भी है 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्ध होते हुए विभिन्न आर्थिक परिस्थितियों को गुजरते समर्पित भाव से समाज सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।
लंबे समय बाद भी गुरू घासीदास सामाजिक चेतना सम्मान से सम्मानित नहीं किए जाने से उनका उपेक्षा करना माना जाता रहा हैं। सतनामी समाज के विभिन्न छोटे बड़े संगठनों द्वारा अवसरवादी बन सामाजिक को राजनीतिक करण कर अपनी रोटी सेंकने स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं। जिनसे समर्पित भाव से समाज सेवा में कार्यरत लोगो को उपेक्षा कर वंचित की जा रही हैं।
पंडित रतन लाल रत्नाकर जी से 2010 से परिवारिक मधुर संबंध रहें हैं,तब से विभिन्न गतिविधियों अलेखो को कैलेण्डर में शामिल करने प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाने का सौभाग्य मिला था। जिसे सहर्ष स्वीकार कर ईमानदारी से काम किया आज भी आदरणीय रत्नाकर जी से मधुर संबंध स्थापित हैं। गिरौदपुरी धाम वार्षिक गुरू दर्शन मेला आयोजन के बाद कोविड 19 महामारी संक्रमण काल लाकडाउन 144 धारा लागू के दौरान नियमों को पालन करते हुए जिले रायपुर से बलौदाबाजार बिलासपुर जांजगीर चांपा महासमुंद के लंबे समय बाद विशेष भ्रमण में पंडित रतन लाल रत्नाकर जी से मिलकर उनके सह परिवार से मिल कर उनके कुशलक्षेम पूछा और विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक धार्मिक विकास उत्थान कार्य वर्तमान समय की दशा और दिशा को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा किया गया। अपना रायपुर से प्रकाशित सतगुरू कैलेण्डर और छत्तीसगढ़ महिमा पत्रिका को भेंट कर उनसे आशीर्वाद ली।


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