Friday, April 9, 2021

छत्तीसगढ़ के मशहूर रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी का निधन



छत्तीसगढ़ के मशहूर रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी का निधन
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा राजनांदगांव। 10 अप्रैल 2021,
छत्तीसगढ़ के मशहूर रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी से जुड़े रोचक तथ्य,मशहूर रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी का लंबी बीमारी के बाद कल 9 अप्रैल 2021 शुक्रवार को उनका निधन हो गया। प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के नया थियेटर में दीपक तिवारी ने लंबे समय तक नाटकों में भूमिकाएं निभाई। दीपक को रंगकर्मी और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। अंतिम समय वे अपने परिवार के साथ राजनांदगांव में रह रहे थे।
,,दबंग कलाकार के रूप में बनाई अपनी पहचान,,
देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के नाटकों में दीपक विराट तिवारी दबंग किरदार निभाते रहे थे। मशहूर नाटक 'चरणदास चोर' में चोर का जीवंत किरदार निभाकर दीपक ने नाट्य कला के क्षेत्र में विश्व में अपनी अलग पहचान बना ली थी। चोरी के इस हुनर के लिए दीपक को देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भी किया था।
फरवरी 2019 में दीपक तिवारी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया ।
जिले बिलासपुर के रहने वाले दीपक विराट तिवारी ने राजनांदगांव को अपना कर्म क्षेत्र बना लिया था। साल 1980-90 के दशक में हबीब तनवीर के ग्रुप नया थियेटर का हिस्सा बने। उन्होंने चरणदास चोर, लाला शोहरत राय, मिट्टी की गाड़ी, आगरा बाजार, कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना, देख रहे हैं नैन, लाहौर नहीं देखा और हिरमा की अमर कहानी जैसे नाटक में अपनी अलग छाप छोड़ी। पिछले 12 सालों से वे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे। कल 9 अप्रैल 2021 दिन शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
थियेटर के लिए नौकरी से निकाले गए दीपक की पत्नी पूनम बताती हैं कि बात करीब 26 साल पुरानी है। जब ​दीपक जनसंपर्क विभाग में नौकरी कर रहे थे। साथ ही हबीब तनवीर के साथ थियेटर भी किया करते थे। इससे सरकार नाराज थी। हम दिल्ली में प्रस्तुति के लिए गए थे। उसी दौरान एक पत्र सरकार की ओर से मिला कि आप यदि थियेटर में ही काम करेंगे तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इन्होंने थियेटर नहीं छोड़ा तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। दीपक विराट तिवारी द्वारा मंचों पर प्रस्तुति। मुंबई के कहानी एवं पटकथा लेखक अशोक मिश्रा बताते हैं कि वो हमसे काम मांगने के लिए मुंबई आए थे। उन्होंने कहा कि इस समय हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं, तो हमें कहीं काम दिलवा दो,तो हम उस वक्त फर्ज सीरियल लिख रहे थे। हमने बात करके उन्हें फर्ज सीरियल (जो पहले डीडी चैनल) पर आता था। उसमें बैगा की भूमिका दिलवा दी थी, तो उन्होंने सीरियल के 10 से 12 एपीसोड में काम किया था, तो कुछ रुपए की व्यवस्था हो गई थी। लेकिन वो लंबे समय तक मंबई में रुके नहीं। वापस 2 से 3 महीने में चले गए। लेकिन बड़े ही जिंदा दिल आदमी थे। उनके अभिनय का लोहा हम सभी लोग मानते हैं। लेकिन जिस तरह से इतने बड़े रंगकर्मी कलाकार को जो सम्मान मिलना चाहिए था। अंतिम समय में उनको नहीं मिला।
मुफलिसी में गुजरी जिंदगी
साल 2015 में राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण से सम्मानित पूनम तिवारी (दीपक की पत्नी) बताती हैं कि करीब दो साल पहले जब इनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई,तो हम लोग तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह से मिले और नौकरी के लिए आवेदन दिया। लेकिन उन्होंने नौकरी देने की बजाय इनके इलाज के लिए 1 लाख रुपए देने की घोषणा की थी। पैसा मिल भी गया, लेकिन आय को लेकर संकट बना रहा। 8/10 के कमरे में पुरानी टीवी और दवाइयों के सहारे ही जीवन चल रहा था। दरअसल साल 2008 से वो लकवाग्रस्त हो गए थे।

No comments:

Post a Comment

चुनिंदा पोस्ट

सहकारिता से जन कल्याण संभव होगा,कहते हैं बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार: सहकारिता मंत्री केदार कश्यप

रायपुर (छत्तीसगढ़ महिमा)। 02 सितंबर 2024, पहला मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिए सहकार तो उसके मूल्य में है लेकिन जब आर्थिक गति...

Popular Posts