छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद
ममतामयी मिनीमाता जयंती विशेष
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर। 13 मार्च 2021,
पिता का नाम - महंत बुधारी दास
माता का नाम - देवमती बाई
जन्म तिथि - 13 मार्च 1913
पति का नाम - गुरु गोसाई अगम दास ,सांसद एवं स्वत्रन्त्रता सेनानी और भारतीय संविधान निर्माण समिति के भी सदस्य रहे।
राजनीति - सन 1952 में उपचुनाव में सांसद बनी।
सन 1957 से 1962 और 1967 में लोकसभा में चौथी बार सांसद बनी|
कार्य - सन 1955 में छुआछूत निवारण कानून पास करायाई, हसदो महानदी परियोजना -1967 - 76
भिलाई इस्पात सयंत्र स्थापना -1961
छत्तीसगढ़ मजदूर संघ की स्थापना-1967
दहेज़ निवारण कानून-1961
छत्तीसगढ़ कल्याण समिति गठन
छत्तीसगढ़ कल्याण महाविद्यालय भिलाई
मिनीमाता बोंगो बांध निर्माण प्रस्ताव पूर्ण- 1981
बालको एल्युमीनियम प्लांट बैलाडीला कोरबा बचेली किरंदुल के विस्तार हेतु प्रस्ताव करा पूर्ण कराई।
मृत्यु - विमान दुर्घटना 11 अगस्त 1972 में।
मिनीमाता का जन्म सन 1913 में असम के नुवागांव जिले के ग्राम जमुनामुख में हुआ था । आपकी माता का नाम मतीबाई था । आपका परिवार मूलतः बिलासपुर जिला निवासी था । 1901 से 1910 के बीच छत्तीसगढ़ के भीषण अकाल ने अधिकांश गरीब परिवारों को जीविका की तलाश में प्रदेश के बाहर जाने के लिए मजबूर कर दिया था। आपके नाना-नानी भी असम के चाय बगानों में काम के लिए रेलगाड़ी द्वारा बिलासपुर से जोरहट गए । इस दौरान उनकी तीन पुत्रियों में से दो की मौत हो गई । एक बेटी, आपकी मां ही जीवित रहीं ।
आपके बाल्यकाल तक परिवार व्यवस्थित हो चुका था । आपका वास्तविक नाम मीनाक्षी था । आपने स्कूली शिक्षा असम में प्राप्त की । आपको असमिया,अंग्रेजी, बांगला, हिन्दी तथा छत्तीसगढी का ज्ञान था । आपके जीवन में नया मोड़ उस समय आया जब सतनामी समाज के गुरु अगमदास धर्म प्रचार के सिलसिले में असम गए और बाद में आपको जीवन संगिनी के रुप में चुना ।
आपने समाज की गरीबी,अशिक्षा तथा पिछड़ापन दूर करने के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया । 1952 से 1972 तक आपने लोकसभा में सारंगढ़, जांजगीर चांपा तथा महासमुंद क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। मजदूर हितों और नारी शिक्षा के प्रति भी जागरुकता और सहयोगी रहीं । बाल-विवाह और दहेज प्रथा को दूर करने के लिए समाज से संसद तक आपने आवाज उठाई । छत्तीसगढ़ में कृषि तथा सिंचाई के लिए हसदेव बांध परियोजना आपकी दूर-दृष्टि का परिचायक है । भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थानीय निवासियों को रोजगार और औद्योगिक प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया ।
आप सद्भावना और ममता की मूर्ति, कुशल गृहणी, सजग सांसद, कर्मठ समाज सेविका और सच्चे अर्थों में छत्तीसगढ़ की स्वप्नदृष्टा थी। 11 अगस्त 1972 को भोपाल से दिल्ली जाते हुए पालम हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटना में निधन हो गया। छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी स्मृति में महिला उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता सम्मान स्थापित किया है ।
ममतामयी मिनीमाता जी के बाद उनकी कार्यों को उनके पुत्र गुरू विजय कुमार जी आगे बढ़ा रहे हैं,वे छत्तीसगढ़ के महान संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की जन्म कर्म स्थली गिरौदपुरी धाम और अगम धाम खडूवापुरी धाम के गुरू गद्दी आसीन हो सतनामी समाज के कुशल नेतृत्व करते आ रहे हैं। गुरू विजय कुमार जी पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान कांग्रेस सरकार में आज गुरू विजय कुमार के पुत्र और ममतामयी मिनीमाता जी की पौत्र गुरू रूद्रकुमार जी केबिनेट मंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग विभाग छत्तीसगढ़ शासन के दायित्व निभा रहे हैं। प्रति वर्ष भव्य त्रिदिवसीय वार्षिक और अर्धवार्षिक त्रिदिवसीय गुरू दर्शन मेला आयोजन गिरौदपुरी धाम और अगम धाम खडूवा पुरी में विजय दशमी दशहरा में गुरू दर्शन मेला का सुचारू रूप से संचालित कराते आ रहे हैं।
2020 में गिरौदपुरी धाम मेला आयोजन समापन के बाद पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में ऐतिहासिक सतनाम संदेश यात्रा प्रारंभ कर संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी की सतोपदेश अमृतवाणी को जन जन तक प्रचार प्रसार करने समाज में एकजुटता लाने सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा मिनीमाता जी की नाम से मिनीमाता अमृत नल जल योजना संचालित भी की जा रही हैं।
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