राजागुरु बालकदास सहादत दिवस विशेष
बाबा जी सतनाम पंथ के,
सात उपदेश बताये हैं ,
सत्य दर्शन एक थाल करा के ,
सत्य की महिमा गाये हैं ।
हम सतनामी हैं,
सतनामी घर जन्म लिये हैं,
सतनामी हैं ,
मगर सतनाम पंथ की ,
संस्कार नहीं तो,
बदनामी हैं ।
धिक्कार है यह जिंंदगी ,
अपनी पहचान खो दिये,
पूर्वजों की आन ,बान,
स्वाभिमान धो दिये ।
भारत का इतिहास गवाह है,
मुगलों ने सतनामियों को,
छेड़ा था,
शायद गुलाम बनाने उन्हें ,
घेरा था ।
मगर सतनाम आन्दोलन,
नारनौल का ,
मुगल शासक से टकराया था,
सतनामी अपना शौर्य,
रणभूमि में दिखलाया था ।
वह एक से नहीं ,
लाखों से टकराया है
वक्त ,वक्त पर अपनी ताकत का ,
एहसास कराया है ।
सतनामी वह चकमक पत्थर है
जो आग उगलता है,
वक्त आने पर,
बारूद बन जाता है ।
गुरु बालकदास का,
सतनाम आन्दोलन ,
दुश्मनों से देखा नहीं गया ,
उनकी अपनी प्रभुता ,
कायम करना ,
सहा नहीं गया ।
आन्दोलन की ललकार से,
दुश्मन थर्राने लगे ,
अपना वर्चस्व खो जाने के भय से,
घबराने लगे ।
आन्दोलन कुचलने का,
षडयंत्र किया गया ,
सामने लड़ने की क्षमता नहीं थी,
छल कपट का सहारा लिया गया ।
मुखिया की हत्या कर ,
आन्दोलन कुचल दिया गया ,
लोगों को सतनामी न कहने ,
भयभीत कर दिया गया ।
सेनापति के अभाव में,
आन्दोलन खत्म हो गया ,
एकता के अभाव में,
समाज बिखर गया ।
अब फिर से वक्त ,
आवाज दे रहा है ,
जागो ,एकता की कतार में आओ,
बुरी नियत ब्याभिचारी,
दुश्मन दूर भगाओ ।
सतनाम आन्दोलन,
एक अनुशासन है,
अपना प्रभुत्व कायम करना है ,
बलीदानी गुरू बालकदास का,
सपना पूरा करना है ।
उठो जागो वीर जवानों ,
शहिदों की संतान हो तुम ,
कायरों के खून नहीं ,
शूरवीरों की पहचान हो तुम ।
ज्ञानी लहरे, गुढियारी रायपुर
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