Thursday, February 25, 2021

IAS जनक प्रसाद पाठक का निलंबन वापस, ऑफिस में महिला से रेप के मामले में किया गया था निलंबित

IAS जनक प्रसाद पाठक का निलंबन वापस, ऑफिस में महिला से रेप के मामले में किया गया था निलंबित 

प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर। 25 फरवरी 2021,छत्तीसगढ़ सरकार ने कलेक्टर ऑफिस में महिला से रेप के आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अफसर जनक प्रसाद पाठक का निलंबन वापस ले लिया है। पिछले साल एक महिला ने आरोप लगाया था,पाठक ने जांजगीर-चांपा कलेक्टर रहते हुए कार्यालय में ही उसका बलात्कार किया था। महिला के बयान और कलेक्टर के साथ अश्लील चैटिंग के दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज किया था। निलंबन के वक्त पाठक संचालक भू-अभिलेख के पद पर रायपुर में तैनात थे।सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव अन्वेष घृतलहरे ने IAS जनक प्रसाद पाठक का निलंबन वापस लेने का आदेश जारी किया है। बताया गया,पाठक ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में निलंबन के आदेश को चुनौती दिया था। पिछले दिनों CAT ने अखिल भारतीय सेवा नियमों के आधार पर पाठक को राहत देते हुए निलंबन हटाने का आदेश दिए थे। GAD के अवर सचिव अन्वेष घृतलहरे ने बताया,CAT के आदेश के आधार पर जनक प्रसाद पाठक का निलंबन आदेश वापस ले लिया गया। उनकी निलंबन अवधि के दौरान कटे हुए वेतन-भत्तों का फैसला बाद में होगा। बताया जा रहा है,इसके लिए मुख्यमंत्री सचिवालय तक फाइल जाएगी।जांजगीर-चांपा जिले की एक NGO संचालक महिला ने जून 2020 में पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर से मिल कर लिखित में शिकायत दी थी। महिला ने आरोप लगाया था,उसका पति सरकारी कर्मचारी है। कलेक्टर रहते हुए जे.पी.पाठक ने 15 मई को महिला का अपने आफिस में ही बलात्कार किया था। उसे धमकी दी गई थी कि उसने उनकी बात नहीं मानी तो उसके पति को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। महिला ने शिकायत के साथ कलेक्टर की ओर से भेजे गये मैसेज का स्क्रीनशॉट भी लगाया था। उसके बाद पाठक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता बन गया। 26 मई 2020 को IAS जे.पी.पाठक का रायपुर तबादला हो गया। उन्हें भू-अभिलेख विभाग का संचालक बनाया गया था। कलेक्टर के तबादले के बाद पीड़ित महिला ने हिम्मत दिखाते हुए SP से लिखित शिकायत की। वरिष्ठ अफसरों का मार्गदर्शन लेने के बाद 3 जून को पुलिस ने IAS अफसर के खिलाफ FIR दर्ज की। 4 जून को सरकार ने जेपी पाठक को निलंबित कर दिया। बाद में पाठक के खिलाफ FIR में SC-ST अत्याचार निवारण कानून की धाराएं भी जोड़ी गईं। गिरफ्तारी से बचने के लिए जनक प्रसाद पाठक ने बिलासपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अगस्त 2020 में अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी। इसके लिए देरी से FIR कराने को आधार बनाया गया। उसके बाद से मामले की जांच जारी थी।

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