Sunday, October 3, 2021

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा संभागीय स्तर पर स्थानीय बोली के अर्न्तसंबंध पर चर्चा एवं संगोष्टी का आयोजन।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा संभागीय स्तर पर स्थानीय बोली के अर्न्तसंबंध पर चर्चा एवं संगोष्टी का आयोजन।
 
◼️स्थानीय बोली, परंपरा, को सहेजना हम सब की भागीदारी है - विक्रम।
 
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा बीजापुर। 4 अक्टबर 2021, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा छतीसगढ़ी एवं स्थानीय बोली के अर्न्तसंबंध के उपर चर्चा एवं संगोष्टी सम्मेलन का आयोजन बीजापुर स्थित आडिटोरियम में किया गया। इस आयोजन के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम शाह मण्डावी थे, कार्यक्रय की अध्यक्षता माता रूखमणी सेवा संस्थान आश्रम के संचालक पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने किया इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, छग राज्य युवा आयोग के सदस्य अजय सिंह, छ.ग. राज्य कृषक कल्याण संघ के सदस्य बसंत राव ताटी, जिला पंचायत सदस्य एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के सदस्य नीना रावतिया उददे, नगरपालिका परिषद बीजापुर के उपाध्यक्ष पुरूषोतम सल्लूर, जिला पंचायत सीईओ रवि कुमार साहू, वरिष्ठ नागरिक लालू राठौर, बब्बू राठी सहित बस्तर संभाग के साहित्यकार कवि एवं जिला समन्वयक शामिल हुऐ।

अतिथियों के स्वागत में गौर-नृत्य का आयोजन किया गया। तत्पश्चात राजगीत से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छतीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव अनिल कुमार भतपहरी ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी एवं बीजापुर के अद्भूत संस्कृति, एवं परंपरा बोली-भाषा एवं पर्यटन की तारीफ की। कार्यक्रम के सभी अतिथियों ने अपना-अपना विचार रखा संस्कृति बोली एवं परंपरा को सहेजने एवं संरक्षित रखने के सुझाव दिये। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थानीय विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम शाह मंडावी ने कहा बीजापुर जिला संस्कृति, सभ्यता, पर्यटन, परंपरा बोली-भाषा से अत्यधिक सम्पन्न जिला है। यहाँ गोण्डी, हल्बी, भतरी, दोरली, तेलगू, मराठी, हिन्दी, छत्तीसगढ़ी जैसे बोली एवं भाषाएँ बोली जाती है। लोगों को उनके स्थानीय बोली से बात करने में आत्मीयता बढ़ती है। विश्वास बढ़ता है।

भ्रमण के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों मे अलग स्थानीय बोली बोलने से एवं समझने से उनकी भावनाएँ समझ में आती है। निश्चित ही अपनी बोली भाषा में सबको गर्व होना चाहिये और उनके संरक्षण के लिये हमेशा तत्पर रहना चाहिए। मुख्यमंत्री जी के अथक प्रयास और पहल से स्थानीय बोली एवं परंपरा को सहेजने का प्रयास छग राजभाषा आयोग द्वारा बहुत लगन से किया जा रहा है।आज बड़े-बड़े कार्यालय, मंत्रालय एवं.सार्वजनिक जगहो पर लोग छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करने लगे है जो छग और छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए  गौरव की बात है।जिला पंचायत सदस्य नीना रावतिया उददे ने स्वरचित रचना स्थानीय बोली में सुनाया वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम ने गोंण्डी में अपना उद्बोधन देते हुऐ संस्कृति एवं स्थानीय बोली के संरक्षण पर विचार रखे। कार्यक्रम के अध्यक्ष पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने भी अपना वक्तव्य दिया। इस दौरान दो पुस्तको का विमोचन किया गया जिसमें ‘‘काव्य शतक’’ शीर्षक नामक पुस्तक जिसमें 100 कविताओं का संग्रहण किया है। जिनके रचियता स्थानीय कवियों द्वारा किया गया जिसमें 14 कवि एवं 4 कवयित्री का कविता संग्रह है। वहीं मधु तिवारी द्वारा रचित पुस्तक ‘‘काव्य संग्रह’’ का भी विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान छग जनसंपर्क द्वारा प्रकाशित जनमन पत्रिका का वितरण भी किया गया। लोगो ने शासन की योजनओं का एवं जनमन पत्रिका की सराहना की।

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