गीता भवन में नि:शुल्क ईलाज हेतु 3 दिवसीय आयोजित शिविर का समापन
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प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा महासमुंद /
सराईपाली। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन जिला ईकाई व वरिष्ठ नागरिकों के तत्वाधान में स्थानीय गीता भवन में स्पीच थेरेपी के तहत तोतलाने और हकलाने वाले का ईलाज किया गया । 3 दिन चले शिविर का समापन सोमवार किया गया जिसमें लाभार्थी हकलाने तुतलाने वालों के साथ समाज के अनेक लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ महाराजा अग्रसेन की पूजा से किया गया इस अवसर परजिला अध्यक्ष नरेशचंद्र अग्रवाल ने कहा कि सादगी के साथ सेवा के उदाहरण सत्यनारायण मित्तल ने 3 दिनों तक निशुल्क सेवा देकर अनेक लोगों को इसका लाभ दिया है। ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में सेवा देना और 8-10 घंटा काम करना, वह भी निशुल्क, निश्चय ही साधुवाद के पात्र हैं । कैट के नगर इकाई अध्यक्ष मदन लाल अग्रवाल ने कहा कि समर्पण भाव से काम करना और इसका लाभ समाज को मिलना सराहनीय काम है। अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने कहा कि सेवा का संकल्प अपने आप में एक कठिन तपस्या है जिसका पालन मित्तल जी कर रहे हैं । छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के मंत्री संजय अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन घांसीराम अग्रवाल ने किया आभार प्रदर्शन बिहारी लाल अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर संजय शर्मा ने कहा कि ऐसे नेक काम के लिए या शिविर के लिए कभी भी गीता भवन की आवश्यकता हो तो निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
शिविर में थैरेपी दे रहे सत्यनारायण मित्तल ने कहा कि उन्होंने अब तक 200 लोगों को इसका लाभ पहुंचाया है ।अब ज्यादा लोगों को लाभ मिले इसके लिए वह गांव-गांव शिविर लगा पा रहे हैं। उन्होंने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि उनके तीन बच्चे तोतलाते थे वे भिवानी में डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने कहा इसका कोई इलाज नहीं है आपको इसकी परेशानी समझ कर घर में ही अभ्यास कराना होगा और उन्होंने तभी यह बीड़ा उठाया और उच्चारण में आ रही परेशानी उसको पकड़ कर उसको दूर करने की तकनीक को विकसित किया।
शिविरसे मिला लाभ
3 दिन चले शिविर में 23 लोगों ने पंजीयन कराया जिसमें 19 लोग समय दे पाए। इसमें काउंसलिंग के लिए 10 -12 घंटे का समय मित्तल जी ने दिया जिन लोगों ने घंटे- 2 घंटे का तीन चार बार सिटिंग की उन्हें पर्याप्त लाभ मिला। 15 लोग शत प्रतिशत,4 को 80% तथा 2 को 50% ठीक किया गया। मित्तल जी ने कहा कि उन्होंने जिन लोगों को देखा उनके साथ उनके उच्चारण मैं आ रही परेशानी को समझा बताया और उसे ठीक करने और उच्चारण सुधारने के तरीके बताएं जिसे अब अभ्यास करके एकदम ठीक किया जा सकेगा उन्होंने यह भी कहा कि इस थैरेपी को कोई सीखना चाहता हो तो वह निशुल्क आगे वाली पीढ़ी को सिखाने के लिए तैयार है । शिविर से मिले लाभ के बाद नागरिकों ने अपने रिश्तेदारों को नागपुर, महासमुंद से बुलाया लाभार्थियों के परिजनों ने अपने अनुभव साझा किया। लाभ मिलने के साथ शहरों में इस थैरेपी महंगी फीस की जानकारी दी। यह शिविर निशुल्क हर समाज के लिए था।
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