छत्तीसगढ के माटी पुत्र रेशम लाल जांगड़े जी की 15 फरवरी जयंती पर विशेष
छत्तीसगढ के माटी पुत्र रेशम लाल जांगड़े जी की 15 फरवरी जयंती पर विशेष
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर। हमारे प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा के सह संपादक लक्ष्मीनारायण लहरे ने श्री जांगड़े के निधन काल समयावधि में ही उनके जीवनी पर सारगर्भित आलेख 12 अगस्त 2014 को लेकर विशेष रूप से विभिन्न प्रिंट मीडिया में प्रकाशित कराया था।
जो आज भी चिर स्मरण के रूप में गूगल में सर्च करने पर आसानी से मिल जाता हैं।
गांव परसाडीह के ही माटीपुत्र युवा सह संपादक सतनाम सार पत्रिका और कैलेण्डर गिरौदपुरी धाम और सतगुग संसार रायपुर से प्रकाशित में श्रवण कुमार घृतलहरे ने 2012 से 2018 तक और 2003 से प्रकाशित गुरू घासीदास कैलेण्डर छत्तीसगढ़ कोरबा से प्रकाशित में भी 2011 से आज पर्यन्त तक और 2019 से स्वयं की संपादन में प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा सुघर गांव रायपुर से प्रकाशित में समय वर मूलचंद और रेशम लाल जांगड़े की जयंती व पुण्यतिथि पर विशेष आलेख समाचार प्रकाशित कर अपनी जन्म कर्म भूमि की माटी पुत्र योगदानों को जन जन तक प्रचार प्रसार करते हुए अपने सामर्थ्य से समर्पित भाव से आज पर्यन्त तक संकल्पित है।
खंडहर में तब्दील जांगड़े जी का परसाडीह का पैतृक निवास।
जिसमें अश्वनी कुमार रात्रे संपादक प्रेस सतनाम सार पत्रिका व सतनाम कैलेण्डर गिरौदपुरी धाम और सतयुग संसार पाक्षिक समाचार पत्र रायपुर की विशेष सहमति मार्गदर्शन सहयोग निरंतर सार्थक बना हुआ था।
उन्होंने अपने साथ श्रवण कुमार जी को श्री रेशम लाल जांगड़े मूलचंद जांगड़े की प्रेरणा और उनके कार्यों को लेकर जागरूकता अभियान लगन को देख अपने दोनों प्रेस में सह संपादक और प्रबंध संपादक की जिम्मेदारी देकर परसाडीह की माटीपुत्र के प्रति अपना ससम्मन कर दायित्व दिया था।
छत्तीसगढ के वरिष्ठ नेता और देश की पहली लोकसभा के सांसद रह चुके स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रेशम लाल जांगडे जी ने जीवन में धन कमाने को अपना उद्देश्य कभी नही माना अपितु अपने जीवन को समाज के लिए समर्पित कर दिया। अपने जीवन में यश,मान-सम्मान ही कमाया। समाज में फैले छुआ-छूत,ऊंच-नीच विसंगतियों से अंतिम सांस तक लडे और देश के लिए जिये। आप का संपूर्ण जीवन निर्विवाद रहा,आपके जीवन से आज के राजनीतिज्ञों को सीखना चाहिए। सतनामी समाज के गौरव और राजनीति के रेशमी धागे निधन देश-प्रदेश और समाज के लिए अपूर्ण क्षति है, जिसकी कभी भरपायी नही हो सकती। आपका नाम इतिहास के पन्ने में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। भारत रत्न के आप हकदार हैं । आज तक आपकी जीवन के पहलुओं पर झांकने की कोशिश नही हुई। आपके सादगी से भरे जीवन का कोई अन्य उदाहरण नहीं है।
तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रथम संसद के सदस्य स्व.श्री रेशम लाल जांगड़े जी का अभिनंदन करते हुए,रेशम लाल जांगडे जी के जीवन इतिहास को देंखें तो उनका नाम इतिहास के जिस पन्ने में अंकित होना चाहिए था अब तक नही हो सका। एक युवा साहित्यकार के मन में कई प्रश्न उपज कर सामने आए और शायद मैं जो कहने की कोशिश कर रहा हूं, लोगों को न पचे। पर उनके जीवन इतिहास को गौर करें तो दिखाई देता है उन्होने अपना जीवन देश-प्रदेश और समाज के लिए जीए। नि:संकोच मैं कहना चाहूंगा मेरे लिए उनके जीवन से परिचित होना और कराना बहुत कठिन है। मेरे बस की बात नही है,फिर भी मेरी कोशिश है कि मैं उनके जीवन के कुछ अंश को कलमबद्व कर संकू और बता सकूं कि छत्तीसगढ के वरिष्ठ नेता और देश की पहली लोकसभा में सांसद रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रेशम लाल जांगडे जी भारत रत्न के हकदार हैं।स्वर्गीय रेशम लाल जी जांगडे का जन्म उस समय हुआ जब अंग्रेजी हुकुमत की तूती बोल रही थी। उस समय विरले ही थे जो अपना जीवन देश के लिए न्यौछावर कर हंस्ते -हंस्ते फांसी में चढ जाते थे ।
ईसाई मिशनरी स्कूल मौहाडीह बिर्राखंडहर में तब्दील।रेशम लाल जी जांगडे का जन्म 15 फरवरी 1925 को तत्कालीन रायपुर वर्तमान में बलौदाबाजार जिले के बिलाईगढ तहसील के ग्राम व ग्राम पंचायत परसाडीह में हुआ था। उनके दादा माखन दास जी गांव के मालगुजार थे। जांगडे जी के पिता का नाम टीकाराम जांगडे, माता का नाम गंगामती जांगडे था। रेशम लाल जांगडे अपने माता -पिता के मंझले पुत्र थे बडे भाई का नाम स्व.मूलचंद जांगडे ( 3 बार विधायक रहे उन्हें सतनामी समाज के पत्रकारिता के पितामह भी कहे जाते हैं ) भाई कन्हैया लाल जी जांगडे, डाँ.भूषण लाल जांगडे ( मनोनित राज्य सभा सांसद सदस्य रहे थे ) और बहन नोनी बाई थी, उनका एक बडा परिवार में जन्म हुआ था। जांगडे जी की प्राथमिक शिक्षा चांपा तहसील के ग्राम मौहाडीह/ बिर्रा और बिलाईगढ तहसील के ग्राम नगरदा में हुई। उन्होंने 5 वीं से 11वीं तक की शिक्षा रायपुर शहर के लारी हाई स्कूल (वर्तमान जे.एन.पाण्डे शासकीय बहु.शाला ) में हुई। उन्होंने छत्तीसगढ कालेज रायपुर से बीए और सन 1947 से 1949 तक नागपुर के विधि महाविद्यालय में महज 25 वर्ष की आयु में एल.एल.बी.तक की शिक्षा प्राप्त की। वे सतनामी समाज में प्रथम अधिवक्ता भी माने जाते रहे हैं। ला ग्रेजुएट होते ही दिसंबर 1949 में ही देश के प्रथम अंतरिम संसद सदस्य मनोनीत किए गए थे। जिसके बाद उन्हें डॉ.अम्बेडकर की भारतीय संविधान निर्माण समिति में सदस्य भी बनाएं गए थे। रेशम लाल जांगडे जी आकर्षक व्यक्तित्व प्रतिभा सम्पन्न तीक्ष्ण बुद्धि तत्कालिक सूझ बूझ से निर्णय की क्षमता लेने की प्रतिभा के धनी थे।
जांगड़े़े मोहल्ला की उनकी समकालीन जैतखाम।साथ ही एक निश्छल उदास स्वभाव सहिष्णुता और सौहाद्र हृदय वाले और साफ सुथरे व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने जीवन में निजी स्वार्थ को परित्याग करते हुये निःस्वार्थ भाव से परमार्थ की सद्भावना से परोपकारिता एवं धर्म परायणता तथा समाज सेवा देश सेवा के लिये अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। आप सतनामी समाज के अग्रपंक्ति के असमान्य व्यक्ति माने जाते हैं। सतनामी समाज आप पर गर्व करता है। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में गांधी जी के आहवान पर अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जब आप 11 वीं की पढाई कर रहे थे उसी दौरान भारत छोडो आंदोलन में भाग लिये। डॉ.खूबचंद बघेल और पंडित सुंदरलाल शर्मा के साथ कदम मिला कर आगे बढे। तभी 12 अगस्त 1942 को गिरफतार हो कर 15 दिन रायपुर के जेल में रहे। इतिहास पर गौर करें तो स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौर में ही जांगडे जी ने राजनीति में अपना कदम रखा तब से पीछे मुड कर नहीं देखा,आगे ही बढते रहे। जब आपने राजनीति में प्रवेश किया तो उस समय समाज मेंअंधविश्वास,जात-पांत,छुआछूत की भावना काफी प्रबल थी। बाबू जगजीवन राम जी,महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा संत शिरोमणि गुरू घासीदास बाबा जी के समरसता और समानता के सतनाम सिद्धांतों के मार्ग में चलकर इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया। आपका विवाह कमला जी से हुआ और आप 3 लडके और दो पुत्री दुर्गा, संध्या के पिता बने। 1950 से 1952 में मनोनीत सांसद, 1952 से 1957 सांसद (कांग्रेस) 1957 से 1962 सांसद (कांग्रेस) 1962 से 1967 विधायक (कांग्रेस) 1972 से 1977 विधायक (निर्दलीय) 1985 से 1989 विधायक (भाजपा) 1989 से 1991 सांसद (भाजपा) 30 वर्ष तक राजनीति के शिखर पर रहे। पंडित जवाहर लाल नेहरू से राजीव गांधी के समय तक सांसद रहे। मध्यप्रदेश सरकार में उप मंत्री के रूप में अपनी सेवाऐं दी। और विपक्ष के उप नेता भी रहे। लोकसभा की 60 वीं वर्षगांठ के अवसर पर 13 मई 2012 को संसद के केन्द्रीय कक्ष दिल्ली में पहली लोकसभा के जिन 4 सदस्यों का अभिनंदन किया गया था। उसमें रेशम लाल जांगडे जी सहित रिशांग किशिंग कंडाला, सुब्रमणियम और कांते मोहन राव भी शामिल थे। आपका राजनैतिक जीवन निर्विवाद रहा। आपने कभी मनोहर दास नृसिंह जी के साथ मिल कर गांव गांव घूम कर भ्रमण करते संत शिरोमणि गुरू घासीदास जी के सतनाम संदेश एवं उनके उपदेशों के प्रचार प्रसार में भी विशिष्ट योगदान दिया हैं। आसाम से छत्तीसगढ़ आ कर आदिकवि बने मनोहर नृसिंह जी जिनके साथ रेशमलाल जांगडे जी ने मिल कर गिरौदपुरी धाम में मेला की शुरूआत भी की थी। गिरौदपुरी धाम आज समग्र सतनामी समाज के वृहद धार्मिक स्थल तथा सच्ची आस्था एवं श्रद्धा का केन्द बिन्दु के रूप में स्थापित है।
रेशम लाल जांगड़े की गृह क्षेत्र भटगांव में स्थापित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके ग्राम परसाडीह के सरपंच एवं ग्रामीण जन। आज जन आस्था विश्वास का केंद्र बिंदु के रूप में गिरौदपुरी धाम बन चुका है। छत्तीसगढ सरकार की ओर से कुतुबमीनार से उंचा जैतखाम निर्मित किया गया है जो विश्व मानस समुदाय के लिये आकर्षक और पर्यटन का केन्द्र बन गया है। जहां प्रति वर्ष लाखों लोग पहुंच कर स्वयं को धन्य मानते हैं। आप ने जीते जी अपने सपनों को साकार होते देखा है।इसी प्रकार सर्व समाज एवं सतनामी समाज के सत पथ प्रदर्शक और प्रेरक रहे हैं। आप की प्रतिभा किसी से नहीं छिपी है। छत्तीसगढ के लाल कर्मठ समाज सेवक सतनामी समाज के गौरव और राजनीति के रेशमी धागे थे। रेशमलाल जांगडे जी। 90 साल की उम्र में रविवार सोमवार की दरम्यानी रात 11अगस्त 2014 को 2 बजे के बीच जीवन की अंतिम सांस ली। आपके जाने से ये समाज और देश प्रदेश व्यथित हो उठा। आप देश प्रदेश और समाज के लिये मिशाल रहे। आपको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। आपके जीवन दर्शन से हमेशा लोगों को ज्ञान मिलेगा और उनका मार्गदर्शन होगा।
युवा साहित्यकार पत्रकार लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर जिला रायगढ छत्तीसगढ मो.नं. 9752319395 (सह संपादक प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर)
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