गौ भक्त राजमहंत नयनदास महिलांग जयंती पर विशेष
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायपुर। 16 अप्रैल 2021,समर्पित समाज सेवक और गौरक्षा आन्दोलन के प्रणेता गौ भक्त राजमंहत नयनदास महिलांग जी का जन्म 7 जनवरी 1881 को ग्राम सलौनी जिला बलौदाबाजार के सम्पन्न कृषक परिवार में हुआ था। वे ब्रिटिश जमाने में शिक्षित और प्रखर राजपुरुष रहे हैं। जिन्होंने अपने युवाकाल में ब्रिटिश सरकार द्वारा करमनडीह ढाबाडीह( बलौदाबाजार ) में संचालित बुचड़खाना को रोके और भाटापारा निपानिया रेल्वे स्टेशन में गौ मांस निर्यात करने की व्यवस्था को बंद करवाकर आपार ख्याति अर्जित किया। फल स्वरुप देश में स्वतंत्रता आन्दोलन और उनके सूत्रधार काँग्रेस के शीर्ष नेतृत्व महात्मा गांधी, मोतीलाल,जवाहर लाल नेहरु आदि दिग्गज नेतृत्वकर्ताओं के संज्ञान में आए। छत्तीसगढ़ प्रदेश से सुन्दरलाल शर्मा,रविशंकर शुक्ल आदि भी आपके प्रभाव में रहे।
आपके पुरुषार्थ,प्रदेय और मार्गदर्शन से ही सतनाम पंथ के गुरु गोसाई अगमदास बाबा जी और समकालीन 72 सतनामी संत- महंत मिलकर समाज का सामूहिक प्रतिनिधित्व किए और 1925-26 में पृथक सतनामी जाति को संवैधानिक दर्जा प्रदान कराने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किए,साथ ही पंथ को धर्म के रुप में विस्तारित करने का बीड़ा उठाया। और आजीवन संघर्षरत रहे। वे स्वतंत्र भारत के मध्यप्रांत के पलारी विधान सभा क्षेत्र से प्रथम यशस्वी विधायक (1957-59) तक रहे। आपका सतलोक प्रयाण 16 अप्रेल 1959 को हुआ। ऐसे प्रखर और कर्मठ समाज सेवक के श्री चरणों में श्रद्धा सुमन समर्पित करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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